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सपनों का शहर

अनंत दास

कक्षा -५

क्रमांक -४

अर्पण एक शांत और गंभीर दिखने वाला बच्चा था । पर हमेशा वह कल्पनाओं के दुनिया में खोया रहता । ड्रैगन से तो उसकी गहरी दोस्ती थी, पंखों वाली मछलियों को तो वह पतंग के धागों से उड़ाता, एलिस वाली दुनिया दूध का तालाब चोकलेट की दीवारों वाली शहर ये तो उसे अपने आँखों के सामने दिख जाते ।

आज विद्यालय में ऐसी घनघोर बारिश हो रही थी । एसा लग रहा था की मानो पूरी विद्यालय ही बह जाएगी । पूरा विद्यालय प्रांगण तालाब बन गया था । अर्पण का मन मचल रहा था की कागज़ की कश्ती बनाने को और पानी मे कूदने लोटने और फिसलने की लेकिन कक्षाध्यापिक  मिलिट्री मेन की तरह छरी पकरकर सरहद पर तैनात जो थी । बारिश के साथ उसके अरमान भी टाइटनिक जहाज की तरह ही धीरे धीरे डूबे जा रहे थे । जैसे ही छुट्टी हुई वह उठा और तेजी से घर की ओर निकल पड़ा । आज तो घर के पास कब्रिस्तान वाले सड़क पर बाढ़ आई हुई थी । तो वह कब्रिस्तान के दीवारों के साथ साथ चलने लगा । आगे दीवार गिरी हुई थी यह तो काफी समय से गिरी हुई थी पर वो कभी इसके अंदर नहीं झाँकता । दरअसल उसने यहाँ की कई कहानिया सुन रखी थी । पर आज एक पौधा बारिश से बह कर बाहर आ गया था । उसने अपने पैरों से उसे हटाना चाहा पर फिर लगा की यह तो मर ही जाएगी । उससे रहा नहीं गया और उसने पौधे को अपने हाथों मे उठा लिया । दीवार के अंदर जाकर उस पौधे को ऊंची जगह पर बो दिया। वो तेजी से घर की ओर चल पड़ा। आज वह बहुत खुश था उसे एक नया दोस्त जो मिल गया था। अगले दिन स्कूल से छूटते ही वह तेजी से वहाँ पहुँचा पर यह क्या वहाँ तो पौधा था ही नहीं पर हाँ एक बड़ा सा पेड़ और बरगद की तरह लटकती हुई लंबी लंबी जड़ें। क्या ये वही था ! उसे लगा की ये जड़ें नहीं ये पेड़ के हाथ हैं जो हिल कर उसे बुला रही है। वो जल्दी से घर को भाग चला। रातभर उसे नींद नहीं आई सुबह होते ही वह तेजी से वहाँ गया। अरे यह क्या यह पेड़ तो आसमान को छु रही थी। उससे रहा ना गया और वो धीरे धीरे जड़ को पकड़कर ऊपर को चढ़ने लगा।

             ऊपर पहुंचते ही देखता है की वहाँ पे उसके कल्पनाएं सच्ची में घट रहे थे पालतू ड्रैगन उसके चारों ओर उड़ रहे थे, आसमान मे पंख वाली मछली, दूध का तालाब, चॉकलेट का शहर वह आश्चर्य से देख ही रहा था किसी ने उसे पीछे से टोका  – अर्पण तुम क्लास के बीच मे सो रहे हो ! एकदम से उसकी नींद खुली और उसने ब्लैक बोर्ड को देखा अरे यह क्या यह तो  ब्लैक होल बन गई और ड्रैगन, मछलियाँ, शहर, पेड़, सब इसमे समाते चले गए। अब जाकर उसकी नींद टूटी।